लातेहार, झारखंड। जिले के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत आरा गांव में शुक्रवार शाम एक हृदयविदारक हादसे में एक ही परिवार के तीन मासूम भाई-बहनों की पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मिली जानकारी के अनुसार, आरा गांव निवासी दारिका गंझू के तीन बच्चे — माही कुमारी (7 वर्ष), दीपिका कुमारी (6 वर्ष) और आर्यन कुमार (3 वर्ष) — गांव के पास स्थित एक पानी से भरे गड्ढे में नहाने गए थे। बताया जाता है कि यह गड्ढा कई वर्ष पहले पत्थर (फायर क्ले) निकालने के लिए खोदा गया था और लंबे समय से खुला पड़ा हुआ था।
नहाने के दौरान बच्चों को गहराई का अंदाजा नहीं लग पाया। एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में तीनों बच्चे गहरे पानी में चले गए और डूब गए।
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद तीनों बच्चों को बाहर निकाला गया। आनन-फानन में उन्हें बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
मृत बच्चों के पिता दारिका गंझू तेतरियाखांड कोलियरी में सीसीएल कर्मी के रूप में कार्यरत बताए जाते हैं। परिजनों के अनुसार, तीनों बच्चे काफी मन्नतों और सिजेरियन ऑपरेशन के माध्यम से जन्मे थे। एक साथ तीन बच्चों को खोने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
ग्रामीणों ने इस घटना को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वह एनटीपीसी के निर्माणाधीन कन्वेयर बेल्ट के निकट स्थित है और इतने खतरनाक गड्ढे को खुले छोड़ देना गंभीर लापरवाही है। हालांकि, इस संबंध में एनटीपीसी या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
घटना की सूचना मिलने के बाद बालूमाथ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस ने तीनों बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए लातेहार सदर अस्पताल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
यह हादसा एक बार फिर खुले और असुरक्षित गड्ढों की निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ऐसे सभी जानलेवा स्थानों को तत्काल सुरक्षित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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