देशभर में बुधवार को केमिस्ट और ड्रगिस्ट संगठनों ने ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। कई राज्यों में दवा दुकानों के बंद रहने से आम लोगों को जरूरी दवाइयों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई।
केमिस्ट संगठनों का कहना है कि सरकार की ओर से जारी **जीएसआर 220(ई)** और **जीएसआर 817(ई)** जैसी अधिसूचनाएं पारंपरिक दवा कारोबार और मरीजों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती हैं। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी के दवाएं बेच रहे हैं, जिससे नियमों का उल्लंघन हो रहा है और छोटे व्यापारियों की आजीविका पर असर पड़ रहा है।
संगठनों के अनुसार, **जीएसआर 817(ई)** ई-फार्मेसी सेक्टर को नियंत्रित करने के लिए लाया गया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है, जिसमें ऑनलाइन दवा बिक्री, स्टॉकिंग, डिलीवरी और मरीजों के रिकॉर्ड से जुड़े प्रावधान हैं। वहीं **जीएसआर 220(ई)** को लेकर भी ऑनलाइन दवा बिक्री और पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया जा रहा है।
हालांकि कुछ संगठनों ने दावा किया है कि आपात सेवाएं और जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति बाधित नहीं होगी, लेकिन सामान्य दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। विशेषकर बुजुर्ग मरीजों और नियमित दवा लेने वालों को परेशानी हो सकती है।
छोटे केमिस्टों का कहना है कि ई-फार्मेसी के तेजी से विस्तार से उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। उनका मानना है कि यदि ऑनलाइन दवा बिक्री को सख्त नियमों के तहत नियंत्रित नहीं किया गया, तो पारंपरिक मेडिकल स्टोर संकट में आ सकते हैं।
हड़ताल केवल व्यापारिक हितों का मुद्दा नहीं, बल्कि दवा बिक्री में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही की मांग भी है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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