धाम के महत्व, प्रचार-प्रसार और विकास को लेकर हुई व्यापक चर्चा
पिछुलिया (पलामू)। तरहसी प्रखंड अंतर्गत उदयपुरा–2 पंचायत में स्थित स्वयंभू बाबा धाम, पिछुलिया के पावन परिसर में आज पिछुलिया मंदिर समिति के तत्वावधान में आयोजित नववर्ष पिकनिक एवं संवाद कार्यक्रम शांतिपूर्ण, श्रद्धामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आसपास के पांच पंचायतों के ग्रामीण, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वयंभू बाबा धाम के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व का प्रचार–प्रसार करना तथा आगामी महाशिवरात्रि महोत्सव की तैयारियों को लेकर आपसी संवाद स्थापित करना रहा। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह अतिप्राचीन और दुर्लभ तीर्थ स्थल अब तक व्यापक जनमानस की दृष्टि से ओझल रहा है, जिसे सामने लाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों के स्वागत से हुई, जहाँ शिवभक्त एवं समाजसेवी प्रेमचन्द जी के द्वारा सभी अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात संवाद सत्र प्रारंभ हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उदयपुरा–2 पंचायत के मुखिया सह विधायक प्रतिनिधि सुजीत कुमार ने कहा कि स्वयंभू बाबा धाम अति प्राचीन है, जिसकी उत्पत्ति का काल अनुमान से परे है। उन्होंने कहा कि अतीत को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वर्तमान और भविष्य को संवारना हम सबका दायित्व है। अब समय आ गया है कि सभी ग्रामीण एकजुट होकर विधायक एवं सांसद के माध्यम से इस स्थल के समुचित विकास और इसे पर्यटन स्थल घोषित कराने की मांग रखें।
नवगढ़ पंचायत के मुखिया पायनियर पांडे ने कहा कि पिछुलिया धाम पहले से ही एक तीर्थ स्थल है, लेकिन इसकी महिमा और महत्व अभी तक आम लोगों तक नहीं पहुँच पाया है। उन्होंने कहा कि यह स्वयंभू शिवधाम, जहाँ सप्तधारा कुंड से निरंतर शिव का जलाभिषेक होता रहता है, अपने आप में एक दैवीय और प्राकृतिक आश्चर्य है, जिसकी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचनी चाहिए।
गोइंदी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि लालमुनि राम ने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि वर्तमान में इस क्षेत्र से जुड़े मुखिया विधायक प्रतिनिधि भी हैं और सांसद प्रतिनिधि भी इसी स्थान से हैं। यह स्वयंभू बाबा धाम के विकास के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिसे सभी को मिलकर सार्थक बनाना चाहिए।
पूर्व सरपंच एवं समाजसेवी नरेश सिंह ने कहा कि पिछुलिया धाम की शुरुआत स्वयं शिव ही जानते हैं। उन्होंने बताया कि वे 82 वर्ष के हैं और चार–पांच वर्ष की उम्र से यहाँ लगने वाले मेले को देखते आ रहे हैं। इसके बावजूद अब तक इस धाम का पूर्ण विकास न होना आश्चर्यजनक है।
इसके अलावा जिला परिषद प्रतिनिधि बहादुर साव, उप प्रमुख अजय सिंह, दूब पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि यशवंत राम, नंदू राम, बचनदेव सिंह, प्रदीप पाठक एवं रीना देवी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। सभी ने कहा कि स्वयंभू बाबा धाम क्षेत्र का एक प्राचीन आस्था केंद्र है और यहाँ स्थित सप्तधारा अमृत कुंड धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्थल न केवल पूजा–अर्चना का केंद्र है, बल्कि धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएँ भी रखता है। यदि मंदिर, तीर्थ स्थल और कुंड का सुनियोजित विकास किया जाए, तो इससे क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
संबोधन के उपरांत उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों एवं अतिथियों ने सप्तधारा अमृत कुंड का सामूहिक रूप से दर्शन किया। इस दौरान बताया गया कि यह कुंड कभी सूखता नहीं है और इसका जल अत्यंत निर्मल एवं स्वादिष्ट है। मान्यता है कि इस कुंड से प्रवाहित जल निरंतर स्वयंभू शिवलिंग को अर्पित होता रहता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। पत्थर में स्थित इस कुंड को लोगों के समक्ष खाली किया गया जहां लोगों ने सप्त धारा का दर्शन किया ।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस कुंड में सात धाराओं से जल प्रवाहित होता है, जिन्हें सप्तनदी—गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नर्मदा, सिंधु और कावेरी का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस कुंड के जल से पूजा–अर्चना करने पर पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह कुंड ठोस पत्थरों के बीच प्राकृतिक रूप से स्थित है, जो इसकी प्राचीनता और दिव्यता को दर्शाता है।
दिव्य कुंड दर्शन के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने कुंड के समीप स्थित मंदिर में जल में अवस्थित स्वयंभू शिवलिंग का दर्शन किया। बताया गया कि यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट है और सदैव जल में अवस्थित रहता है। स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि यहाँ का जल भी कभी सूखता नहीं, जिसे स्वयंभू शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रमाण माना जाता है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार सप्तधारा अमृत कुंड से प्रवाहित जल ही निरंतर इस स्वयंभू शिवलिंग का स्वाभाविक अभिषेक करता रहता है। यही कारण है कि इस स्थान को अत्यंत पवित्र माना जाता है और श्रद्धालु यहाँ दर्शन मात्र से ही आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। मान्यता है कि स्वयंभू शिव का यह स्वरूप सतत जलाभिषेक में स्थित होकर भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।
कार्यक्रम के अंत में पिछुलिया मंदिर समिति ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनसहयोग से बाबा धाम के विकास को नई दिशा दी जाएगी। अंत में सभी लोगों ने पिकनिक के रूप में एक साथ बैठकर बाबा का प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर विकर्मा सिंह, अशोक सिंह, नवीन सिंह, उमेश सिंह, प्रेमचंद विश्वकर्मा, रामनंदन प्रजापति, बबलू दुबे, भोला भुइया, मंगल भुइयां, अर्जुन सिंह, नकुल सिंह, पंचम सिंह, अरविंद सिंह, संतोष सिंह, उदय सिंह, भोला पाठक, योगेंद्र पाठक, तेतर साव, सूर्यानंद विश्वकर्मा, भास्कर पाठक, शंभू राम, जगदीश भुइया सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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