मेदिनीनगर: पलामू कांग्रेस के जिला प्रवक्ता गोपाल सिंह ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मनरेगा को कमजोर करना या उसके अस्तित्व से छेड़छाड़ करना केंद्र सरकार को भारी पड़ेगा। यह सिर्फ़ किसी योजना का नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों मज़दूरों की रोज़ी-रोटी, आत्मसम्मान और अधिकारों पर किया गया सीधा और सुनियोजित हमला है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए जीवनरेखा है। यह योजना भूख, बेरोज़गारी और मजबूर पलायन के खिलाफ़ गरीबों की सबसे बड़ी ढाल रही है। भाजपा सरकार इसी ढाल को तोड़ना चाहती है, ताकि मज़दूर फिर से असुरक्षा और दया पर निर्भर हो जाए। यह नीति नहीं, बल्कि गरीब विरोधी मानसिकता का खुला प्रदर्शन है।
पलामू कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल सिंह ने कहा कि अब मनरेगा का नाम बदलकर “वी बी जी राम जी” कर दिया गया है, जिसका पूरा नाम “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नाम परिवर्तन एक चालाक राजनीतिक साज़िश है, जिसके ज़रिये राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम, उनकी विचारधारा और उनके संघर्ष को योजनाबद्ध तरीके से मिटाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह उस विचार पर हमला है जिसमें श्रम को सम्मान और रोज़गार को अधिकार माना गया है। भाजपा सरकार गांधी के नाम से डरती है, क्योंकि गांधी का नाम सत्ता की तानाशाही, कॉरपोरेट लूट और सामाजिक अन्याय के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है।
गोपाल सिंह ने आगे कहा कि एक ओर भाजपा सरकार मज़दूरों के अधिकारों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के बजट में कटौती, भुगतान में देरी और अब नाम बदलकर इस योजना को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका सीधा असर गरीब, किसान और मज़दूर वर्ग पर पड़ रहा है।
अंत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी इस साज़िश को किसी भी क़ीमत पर सफल नहीं होने देगी। मज़दूरों के हक़, रोज़गार की गारंटी और उनके आत्मसम्मान की यह लड़ाई कांग्रेस पूरी मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ लड़ेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रव्यापी “मनरेगा बचाओ अभियान” लगातार जारी रहेगा और जब तक केंद्र सरकार अपने जनविरोधी फैसले वापस नहीं लेती, तब तक यह संघर्ष सड़क से संसद तक चलता रहेगा।

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