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झारखंड कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल, 15.15 लाख करोड़ के कथित घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग

रांची/डालटनगंज। देश में चर्चा का विषय बने 15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस मामले को आम जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी संस्थाओं में निवेशित धन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव विनय सिन्हा दीपु ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि इस कथित घोटाले की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की प्रमुख सार्वजनिक वित्तीय संस्थाएं एलआईसी और एसबीआई के माध्यम से करोड़ों निवेशकों की पूंजी जोखिम में डाली गई है, जिसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

विनय सिन्हा ने कहा कि यदि किसी बड़े कॉरपोरेट समूह को नियमों की अनदेखी कर अनुचित लाभ पहुंचाया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे निवेशकों की बचत ऐसे संस्थानों में लगी हुई है, इसलिए सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

निवेशकों की सुरक्षा पर उठे सवाल

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देशभर के करोड़ों लोगों ने अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एलआईसी और अन्य वित्तीय संस्थानों में निवेश किया है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या निवेश संबंधी गड़बड़ी हुई है, तो उसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है।

प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर संतोषजनक जवाब देने से बच रही है। पार्टी का कहना है कि निवेशकों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

 उच्च स्तरीय जांच की मांग

कांग्रेस ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि देश की जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने स्पष्ट किया कि निवेशकों के हितों से जुड़े इस मुद्दे को वे लगातार उठाते रहेंगे और आवश्यकता पड़ने पर इसे सड़क से लेकर सदन तक ले जाएंगे।

जनता के विश्वास की परीक्षा

यह मामला केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के विश्वास और उनकी जीवनभर की कमाई से जुड़ा है। ऐसे में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच ही वह रास्ता है, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम रखा जा सकता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है।

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