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रामपुर गोलीकांड: पुलिस रिमांड में प्रताड़ना का आरोप, परिजनों ने निष्पक्ष जांच और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाने की कही बात

मुख्य आरोपी मंटू सिंह के परिजनों ने पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगाया, जबकि पुलिस ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि चोटें आरोपी ने स्वयं पहुंचाई हैं।

मेदिनीनगर: पलामू जिले के चर्चित रामपुर गोलीकांड मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले के मुख्य आरोपी मंटू सिंह के परिजनों ने पुलिस रिमांड के दौरान उनके साथ मारपीट और शारीरिक प्रताड़ना किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

परिजनों का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान पुलिसकर्मियों ने मंटू सिंह के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसके कारण उनकी कमर के निचले हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं। उनका दावा है कि शरीर के पिछले हिस्से में सूजन आ गई है और त्वचा का रंग लाल तथा काला पड़ गया है।

दूसरी ओर, पलामू जिला पुलिस के अधिकारियों ने आरोपों को गलत बताया है। अधिकारियों के अनुसार, मंटू सिंह ने स्वयं अपने शरीर के निचले हिस्से को जमीन और दीवार से रगड़कर चोट पहुंचाई है। पुलिस का कहना है कि मारपीट की कोई घटना नहीं हुई है।

जानकारी के अनुसार, मंटू सिंह ने 9 जून को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद 22 जून को चैनपुर थाना पुलिस ने उन्हें 24 घंटे की पुलिस रिमांड पर लिया था। इसी दौरान प्रताड़ना के आरोप सामने आए हैं।

परिजनों का आरोप है कि पूछताछ के नाम पर मंटू सिंह को शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया। उनका कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति की मेडिकल जांच कराई जाती है और मेडिकल रिपोर्ट में भी कथित प्रताड़ना के संकेत मिलने का दावा किया जा रहा है।

मामले को लेकर परिजनों ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो वे इस मामले को कस्टोडियल टॉर्चर (हिरासत में प्रताड़ना) के रूप में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन और हाई कोर्ट तक ले जाएंगे।

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