रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशी के रूप में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता बैद्यनाथ राम के नाम की घोषणा कर दी है। पार्टी के इस फैसले के बाद बैद्यनाथ राम एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गए हैं। झामुमो ने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन के प्रति योगदान को देखते हुए उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। बैद्यनाथ राम का राजनीतिक जीवन संघर्ष, अनुभव और जनसेवा की लंबी यात्रा से जुड़ा रहा है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और शिक्षक के रूप में कार्य किया। वर्ष 2000 में उन्होंने शिक्षण कार्य छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा और जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। उसी वर्ष जनता दल (यू) के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने। बाद में एनडीए सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 2005 में उन्हें चुनावी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने राजनीतिक सक्रियता बनाए रखी। वर्ष 2009 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर दूसरी बार विधायक बने और अर्जुन मुंडा सरकार में शिक्षा एवं उत्पाद विभाग के मंत्री रहे। वर्ष 2014 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। इसके बाद उन्होंने झामुमो का दामन थामा और वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज कर तीसरी बार विधायक बने। हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी भी मिली। हालांकि 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी प्रकाश राम के हाथों 434 मतों से हार का सामना करना पड़ा। अब झामुमो ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाकर यह संकेत दिया है कि पार्टी आज भी उनके अनुभव और राजनीतिक योगदान को महत्वपूर्ण मानती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि वे निर्वाचित होते हैं तो झारखंड से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
अनुभव को मिला सम्मान
तीन बार विधायक और कई बार मंत्री रह चुके बैद्यनाथ राम को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन के प्रति निष्ठा का सम्मान माना जा रहा है। अब सभी की नजरें राज्यसभा चुनाव पर टिकी हैं, जहां उनका राजनीतिक सफर एक नए अध्याय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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