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खनिज संशोधन विधेयक से झारखंड को भारी राजस्व नुकसान की आशंका : जैश रंजन पाठक

सालाना 10 हजार से 14,656 करोड़ रुपये तक राजस्व नुकसान का दावा, कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ने की जताई आशंका

मेदिनीनगर। झारखंड कांग्रेस कमेटी के राज्य सचिव जैश रंजन पाठक उर्फ बिट्टू पाठक ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों पर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया कि विधेयक के लागू होने से झारखंड को हर वर्ष करीब 10 हजार से 14,656 करोड़ रुपये तक के राजस्व का नुकसान हो सकता है।

जैश रंजन पाठक ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन के बाद राज्यों की खनिज संपदा और भूमि पर अतिरिक्त कर, सेस या शुल्क लगाने की शक्ति प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले के आधार पर झारखंड सरकार ने खनिज और भूमि पर सेस लगाकर वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 13 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया था। नए प्रावधान लागू होने की स्थिति में इस आय पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र झारखंड के राजस्व का प्रमुख स्रोत है। वर्ष 2024-25 में राज्य के गैर-कर राजस्व में खनन क्षेत्र की हिस्सेदारी 84.9 प्रतिशत रही थी। ऐसे में खनन से मिलने वाले अतिरिक्त राजस्व में कमी का सीधा असर राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है।

जैश रंजन पाठक ने कहा कि खनिज राजस्व से राज्य में कई जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित होती हैं। राजस्व में कमी आने पर महिलाओं, गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के लिए चल रही मंईयां सम्मान योजना और अबुआ आवास योजना जैसी योजनाओं के वित्तपोषण पर भी असर पड़ने की आशंका है।

उन्होंने केंद्र सरकार से झारखंड के आर्थिक और जनहित से जुड़े हितों को ध्यान में रखते हुए विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की।

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