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टीबी मुक्त भारत की मुहिम में विद्यार्थियों ने बढ़ाया कदम, आदिवासी संस्कृति बचाने का लिया संकल्प

डंडारकला, पांकी। जनसंवाद न्यूज संवाददाता

राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) एवं राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में टीबी मुक्त भारत जागरूकता अभियान एवं विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षय रोग (टीबी) के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक योगदान के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दिलीप कुमार राम ने कहा कि टीबी केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का विषय है। समय पर जांच, सही उपचार और जन-जागरूकता के माध्यम से टीबी को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक बनने और अपने आसपास के लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव एवं उपचार के बारे में जानकारी देने की अपील की।

विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्राचार्य ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराएं, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सामुदायिक जीवन-पद्धति भारतीय सभ्यता की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण तथा सम्मान करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम का नेतृत्व एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. बंशीधर सिंह एवं एनसीसी पदाधिकारी डॉ. आलोक कुमार पाठक ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने और समाज में स्वास्थ्य संबंधी भ्रांतियों को दूर करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन खोठा विभाग के अशोक राम ने किया। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान एवं विश्व आदिवासी दिवस के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं आईक्यूएसी सेल के समन्वयक डॉ. राजीव रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी सहित एनएसएस और एनसीसी के स्वयंसेवक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने टीबी मुक्त भारत का संदेश जन-जन तक पहुंचाने, स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने तथा आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन टीबी मुक्त भारत, सामाजिक जागरूकता और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ हुआ।

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