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झारखंड के आकांक्षी जिलों में स्वास्थ्य संकेतकों में तेजी से सुधार: फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 25 मई से NBS ( Night Blood Survey )

पांकी (झारखंड): नीति आयोग और पिरामल स्वास्थ्य के संयुक्त प्रयासों से झारखंड के आकांक्षी जिलों में स्वास्थ्य और पोषण संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य प्रदाताओं की क्षमता को मजबूत करना और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य मॉडल को प्रभावी बनाना है।
पिछले वर्ष 10 अगस्त से 25 अगस्त तक Mass Drug Administration (MDA) कार्यक्रम के तहत फाइलेरिया उन्मूलन के लिए पात्र नागरिकों को जो दो वर्ष से ऊपर के थे उन्हें दवाओं का वितरण किया गया था। कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों की कमी के कारण पोषण सहायता बाधित हो रही है।
अब इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। आगामी 25 मई से 5 जून तक फाइलेरिया नियंत्रण के तहत विशेष रूप से चयनित क्षेत्रों में ‘NBS’ (रक्त परीक्षण आधारित निगरानी) किया जाएगा। इस दौरान संभावित संक्रमणों की पहचान कर आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सभी ANM को प्रशिक्षण और दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं। यह अभियान "मिशन मोड" में संचालित किया जाएगा ताकि हर पात्र नागरिक तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
इस कार्यक्रम से जुड़ी समीक्षा बैठक का संचालन अनिल कुमार गुप्ता (डीएल, पिरामल फाउंडेशन) ने किया। बैठक में प्रभारी महेंद्र प्रसाद, अनुज कुमार , राज नारायण झा (कार्यक्रम पदाधिकारी), अनल कुमार (MTS, पांकी) समेत अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही।
25 मई से शुरू हो रहा यह NBS ( Night Blood Survey ) पांकी प्रखंड में फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो आकांक्षी जिलों के समग्र स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती देगा।

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