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किसान की बेटी ने कॉमर्स में लहराया परचम, दिहाड़ी मजदूर की बिटिया बनी आर्ट्स टॉपर

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा बुधवार को इंटरमीडिएट (12वीं) के तीनों संकायों — साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स — का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया। इस वर्ष भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्यभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

साइंस संकाय में धनबाद की राशीदा नाज, आर्ट्स में बोकारो की छोटी कुमारी और कॉमर्स में रांची की श्वेता प्रसाद ने राज्य में प्रथम स्थान हासिल कर झारखंड का नाम रोशन किया है। खास बात यह रही कि साधारण और संघर्षपूर्ण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली इन बेटियों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से सफलता की नई मिसाल कायम की।

साइंस में राशीदा नाज बनीं स्टेट टॉपर

धनबाद जिले के झरिया स्थित जमाडोबा रमजानपुर की रहने वाली राशीदा नाज ने साइंस स्ट्रीम में 489 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया। राशीदा डीएवी प्लस टू हाई स्कूल पाथरडीह की छात्रा हैं और शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं।

राशीदा के पिता एक आउटसोर्सिंग कंपनी में प्राइवेट नौकरी करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। राशीदा ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों के मार्गदर्शन और नियमित अध्ययन को दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन क्लासेस से अधिक स्कूल की पढ़ाई पर भरोसा किया। गणित उनका पसंदीदा विषय है, जबकि सबसे अधिक अंक उन्हें केमिस्ट्री में मिले हैं।

दिहाड़ी मजदूर की बेटी बनी आर्ट्स टॉपर

बोकारो जिले की छोटी कुमारी ने आर्ट्स संकाय में 478 अंक प्राप्त कर राज्य में पहला स्थान हासिल किया। वह केएन +2 हाई स्कूल, हरनाड की छात्रा हैं।

छोटी कुमारी के पिता भवानी शंकर नायक दिहाड़ी मजदूर हैं और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी माता गृहिणी हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद छोटी ने अपनी पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया। लगातार मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक अभाव भी बाधा नहीं बन सकते।

किसान की बेटी ने कॉमर्स में किया कमाल

रांची की श्वेता प्रसाद ने कॉमर्स संकाय में राज्यभर में पहला स्थान प्राप्त किया। श्वेता के पिता किसान हैं। खेती-किसानी से जुड़े परिवार से आने वाली श्वेता ने अपनी मेहनत और लगन से यह उपलब्धि हासिल कर ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा पेश की है।

बेटियों की सफलता बनी प्रेरणा

तीनों टॉपर्स की सफलता ने यह संदेश दिया है कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह नहीं रोक सकती। मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार व शिक्षकों के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। झारखंड की इन बेटियों की उपलब्धि पूरे राज्य के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

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