“सिर्फ बंदूक नहीं, भरोसा और संवाद भी जरूरी” — आत्मसमर्पण और पुनर्वास पर जोर दे रही लातेहार पुलिस
लातेहार में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई अब केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गई है। जिले के एसपी कुमार गौरव ने इस अभियान को एक मानवीय और सामाजिक दिशा देने की पहल की है। जहां एक ओर सुरक्षा बल नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन अब उनके परिवारों तक पहुंचकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
एसपी कुमार गौरव लगातार नक्सल प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं और नक्सलियों के परिजनों से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं। इन मुलाकातों के दौरान उन्हें सरकार की आत्मसमर्पण नीति, पुनर्वास योजनाओं और बच्चों की शिक्षा-सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी दी जा रही है। पुलिस की इस नई पहल का असर अब गांवों में भी दिखाई देने लगा है। ग्रामीण पहले की तुलना में अधिक खुलकर अपनी समस्याएं पुलिस अधिकारियों के सामने रख रहे हैं।
कुमार गौरव के लातेहार में पदभार संभालने के बाद जिले में नक्सल विरोधी अभियानों को नई गति मिली है। कई इनामी नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए, जबकि कई उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला लिया। लगातार हो रही कार्रवाई से नक्सली संगठनों का नेटवर्क कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एसपी कुमार गौरव सख्त प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ संवेदनशील व्यक्तित्व भी रखते हैं। यही वजह है कि आम लोगों का भरोसा पुलिस पर बढ़ा है और नक्सल गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं तेजी से पुलिस तक पहुंच रही हैं। इसका सीधा असर अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है।
### युवाओं को भटकने से रोकने पर विशेष फोकस
एसपी कुमार गौरव का मानना है कि नक्सली संगठन अक्सर बेरोजगार और भटके हुए युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में पुलिस केवल कानून व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि युवाओं को शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य की दिशा में प्रेरित करने पर भी जोर दे रही है।
उन्होंने साफ कहा कि जो लोग हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं, उनके लिए आत्मसमर्पण सबसे बेहतर विकल्प है। पुलिस प्रशासन उन्हें सुरक्षा, सम्मान और नई शुरुआत का अवसर देने के लिए तैयार है।
एसपी ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि जिले में बचे हुए नक्सलियों के लिए अब ज्यादा जगह नहीं बची है। उन्हें या तो कानून के सामने आत्मसमर्पण करना होगा या फिर सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। पुलिस हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
### मजबूत निष्कर्ष
लातेहार में पुलिस की यह पहल केवल नक्सलवाद खत्म करने का अभियान नहीं, बल्कि टूटे हुए विश्वास को जोड़ने की कोशिश भी है। जब प्रशासन गांवों तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनता है और युवाओं को नई दिशा देने की बात करता है, तब बदलाव की उम्मीद मजबूत होती है। नक्सलवाद के खिलाफ असली जीत केवल हथियारों से नहीं, बल्कि भरोसे, संवाद और विकास से हासिल होती है।
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