रामगढ़:- रामगढ़ से एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जहां भूमि अधिग्रहण मुआवजा भुगतान में लंबे समय से हो रही देरी पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने बकाया राशि की वसूली के लिए उपायुक्त कार्यालय से संबंधित चल संपत्तियों की कुर्की का आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।
जानकारी के अनुसार, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सह विशेष न्यायाधीश (एलए) शिवेंदु द्विवेदी की अदालत ने लैंड रेफरेंस केस संख्या 26/1986 एवं लैंड एक्विजिशन एग्जीक्यूशन केस संख्या 4/2004 में यह आदेश पारित किया। यह मामला रामगढ़ न्यायालय के सबसे पुराने लंबित मामलों में गिना जा रहा है।
अदालत ने कहा कि वर्ष 2004 में पारित अवार्ड के तहत संबंधित पक्ष को मुआवजा राशि का भुगतान किया जाना था। इसमें मूल मुआवजे के साथ 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी शामिल था। लेकिन दो दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद भुगतान नहीं होने के कारण बकाया राशि बढ़कर करीब 87 लाख 43 हजार 824 रुपये हो गई।
न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए बैलिफ को निर्देश दिया है कि वह उपायुक्त कार्यालय से जुड़ी चल संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई सुनिश्चित करे। आदेश के दायरे में सरकारी वाहन समेत अन्य चल संपत्तियां शामिल की गई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बकाया राशि जमा होने तक कुर्की की कार्रवाई प्रभावी रहेगी।
साथ ही बैलिफ को 25 मई 2026 तक कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। कुर्की वारंट 19 मई 2026 को जारी किया गया था।
इस आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। किसी कार्यरत डीसी कार्यालय की संपत्तियों की कुर्की का आदेश बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। यह मामला वर्षों से लंबित भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामलों और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण मामलों में समय पर मुआवजा भुगतान नहीं होने पर अदालत को कुर्की जैसी कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है। अब सभी की निगाहें 25 मई पर टिकी हैं। यदि तय समय तक भुगतान नहीं हुआ तो न्यायालय आगे और कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
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