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झारखंड हाईकोर्ट सख्त, ऑनलाइन भू-अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही होंगे डिजिटल हस्ताक्षर

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में ऑनलाइन भू-अभिलेखों में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि अब भूमि से संबंधित ऑनलाइन रिकॉर्ड को संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) भौतिक अभिलेखों से मिलान कर सत्यापित करेंगे और सत्यापन के बाद ही उन पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जाएंगे। केवल प्रमाणित रिकॉर्ड ही ऑनलाइन पोर्टल पर प्रदर्शित किए जाएंगे।

न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को इस आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही पहले से पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड की भी समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने को कहा गया है।

लोहरदगा के रैयत की याचिका पर सुनवाई

मामला लोहरदगा जिले के कुरू प्रखंड स्थित बरीडीह गांव निवासी राम प्रकाश भगत उर्फ राम प्रकाश उरांव की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनके पूर्वजों का नाम भौतिक अभिलेखों एवं रिविजनल सर्वे खतियान में सही दर्ज है, लेकिन वर्तमान सर्वे रिकॉर्ड और ऑनलाइन रजिस्टर-2 में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज हो गया है।

उन्होंने कई बार संबंधित अंचल कार्यालय में आवेदन देकर त्रुटि सुधार की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

12 सप्ताह में पूरी होगी प्रक्रिया

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह के भीतर कुरू अंचल अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि आवेदन प्राप्त होने के बाद अंचल अधिकारी सभी संबंधित अभिलेखों की जांच करेंगे। यदि भौतिक रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता अथवा उनके पूर्वजों का नाम दर्ज पाया जाता है तो आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

कोर्ट ने पूरी जांच और सुधार प्रक्रिया को 12 सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।

डेटा एंट्री की गलतियों पर अदालत की चिंता

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड और भौतिक अभिलेखों में अंतर पाया गया है। कहीं नाम गलत दर्ज हैं तो कहीं प्लॉट संख्या, खाता संख्या और भूमि के रकबे में त्रुटियां देखने को मिल रही हैं।

अदालत ने माना कि ऐसी समस्याएं मुख्य रूप से डेटा एंट्री के दौरान हुई मानवीय भूलों या आउटसोर्स एजेंसियों की लापरवाही के कारण उत्पन्न हुई हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है और छोटी-छोटी त्रुटियों के सुधार के लिए भी उन्हें अदालत का सहारा लेना पड़ रहा है।

ऑनलाइन रिकॉर्ड होना चाहिए ‘मिरर कॉपी’

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड, भौतिक रजिस्टर-2 एवं अन्य सरकारी अभिलेखों की हूबहू प्रतिलिपि यानी "मिरर कॉपी" होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि अब तक ऐसा कोई स्पष्ट तंत्र नहीं दिखता, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि ऑनलाइन रिकॉर्ड का सत्यापन राजस्व अधिकारियों द्वारा किया जाता है।

डिजिटल हस्ताक्षर के बाद ही दिखेंगे रिकॉर्ड

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अब सभी जिलों के अंचल अधिकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड का भौतिक अभिलेखों से मिलान करेंगे। सत्यापन के बाद वे संबंधित प्रविष्टियों पर डिजिटल हस्ताक्षर करेंगे और केवल प्रमाणित प्रविष्टियां ही पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएंगी।

अदालत ने पहले से अपलोड किए गए रिकॉर्ड की भी पुनः जांच करने तथा किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत तत्काल सुधार करने का आदेश दिया है।

मुख्य सचिव और विभागीय सचिव को भेजी गई आदेश की प्रति

हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव और राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को तत्काल फैक्स एवं ई-मेल के माध्यम से भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही विभागीय सचिव को आवश्यक प्रशासनिक आदेश जारी कर व्यवस्था लागू करने को कहा गया है।

आम लोगों को मिलेगी राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे ऑनलाइन रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी, भूमि विवादों में कमी आएगी और आम लोगों को छोटी-छोटी त्रुटियों के सुधार के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

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