सैकत चट्टोपाध्याय बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, मुनमुन चक्रवर्ती को मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार
मेदिनीनगर, प्रतिनिधि।
हिमाचल प्रदेश के शिमला में ऑल इंडिया आर्टिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता में पलामू की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था मासूम आर्ट ग्रुप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात पुरस्कार अपने नाम किए और झारखंड का मान बढ़ाया। संस्था द्वारा प्रस्तुत नाटक "फिर मिलेंगे" को प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ नाटक का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।
मासूम आर्ट ग्रुप के उपाध्यक्ष अमर कुमार भांजा ने बताया कि प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों की रंगमंचीय टीमों ने भाग लिया था। मासूम की प्रस्तुति "फिर मिलेंगे" में एक ट्रक चालक की ईमानदारी, रिश्तों के प्रति उसकी जिम्मेदारियों तथा समाज और परिवार में उसकी भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक की संवेदनशील प्रस्तुति को दर्शकों और निर्णायकों ने खूब सराहा।
सात श्रेणियों में मिला सम्मान
नाटक के लेखक एवं निर्देशक सैकत चट्टोपाध्याय को सर्वश्रेष्ठ लेखक तथा सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का प्रथम पुरस्कार मिला। वहीं ट्रक चालक सूरज प्रसाद की मुख्य भूमिका के सशक्त अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का प्रथम पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
नाटक में सीता की भूमिका निभाने वाली मुनमुन चक्रवर्ती को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का प्रथम पुरस्कार मिला। विनय चौहान को उत्कृष्ट प्रकाश व्यवस्था के लिए सर्वश्रेष्ठ लाइटिंग इफेक्ट का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं श्यामली घोष को सावित्री की भूमिका के लिए अभिनेत्री वर्ग में सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
नाटक के अन्य कलाकारों में अमर भांजा, गुलशन मिश्रा, उज्ज्वल सिन्हा, राज प्रतीक पाल, प्रकाश ठाकुर, प्रकाश कुमार एवं राहुल चंद्रवंशी शामिल थे। संगीत प्रभाव राहुल कुमार ने दिया, जबकि संगीत संयोजन राजा सिन्हा और गीत मानस राय के थे।
सैकत चट्टोपाध्याय को मिला सुदर्शन गौड़ कला गौरव सम्मान
राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता के दौरान रंगमंच के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सैकत चट्टोपाध्याय को प्रतिष्ठित "सुदर्शन गौड़ कला गौरव सम्मान" से भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रतिवर्ष देश के उन रंगकर्मियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो।
सम्मान प्राप्त करने के बाद सैकत चट्टोपाध्याय ने इस उपलब्धि को पूरे पलामू जिले के नाम समर्पित करते हुए कहा कि यह सम्मान पलामू की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और यहां के रंगकर्मियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
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