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पांकी के कोनवाई में पानी को लेकर फूटा जनाक्रोश, घंटों सड़क जाम के बाद प्रशासन के आश्वासन पर समाप्त हुआ आंदोलन

पांकी (पलामू)। पांकी प्रखंड के कोनवाई पंचायत में वर्षों से चली आ रही भीषण पेयजल समस्या को लेकर रविवार को ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। महिला, पुरुष, बुजुर्ग और युवाओं की बड़ी संख्या खाली बाल्टी, घड़े और बर्तन लेकर सड़क पर उतर आई और पांकी-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया।
 आंदोलन के कारण मुख्य मार्ग के दोनों ओर लगभग डेढ़ किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे यात्रियों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा, जबकि कई वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा

आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा, "पानी की घोर संकट की समस्या दूर करो" और "नल-जल योजना फेल है"। ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से कोनवाई पंचायत भीषण जल संकट से जूझ रही है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। लोगों का आरोप था कि सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी इस क्षेत्र में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आंदोलन की पूर्व सूचना भी प्रशासन को दी गई थी, इसके बावजूद समस्या के समाधान की दिशा में गंभीर पहल नहीं की गई। यही कारण है कि आखिरकार लोगों को सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार की मांगें रखीं। उन्होंने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल डीप बोरिंग कराई जाए, टैंकरों के माध्यम से नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जाए तथा हर घर तक पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वहीं स्थायी समाधान के रूप में अमानत नदी से लिफ्ट इरिगेशन योजना शुरू करने, कोनवाई बाजार में बड़ी जलमीनार का निर्माण कराने और पूरे क्षेत्र में शुद्ध पेयजल की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पांकी थाना प्रभारी दीपक सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसके बाद पांकी प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी राजीव कुमार भी जाम स्थल पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। उन्होंने तत्काल जिले के अधिकारियों और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से संपर्क स्थापित किया, जिसके बाद समाधान की दिशा में वार्ता आगे बढ़ी और माहौल धीरे-धीरे शांत होने लगा।

मौके पर मौजूद पूर्व प्रत्याशी लाल सूरज ने कहा कि कोनवाई में जल संकट कोई नई समस्या नहीं है। वर्ष 2016 में भी इसी तरह का आंदोलन हुआ था। उस समय प्रशासन की ओर से लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से घर-घर पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक वह केवल आश्वासन बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में जल संकट को प्रमुख मुद्दा बनाकर वोट मांगे जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों द्वारा समस्या के समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं किया जाता। यही कारण है कि आज लोगों का सब्र टूट गया है और उन्हें सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है।

आंदोलन की सूचना मिलने के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सहायक अभियंता राजेश कुमार सिंह और जूनियर इंजीनियर श्रीकांत भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ विस्तृत वार्ता की। सहायक अभियंता ने कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक से दो दिनों के भीतर डीप बोरिंग का कार्य शुरू किया जाएगा, जलमीनार से संबंधित कार्य तीन से चार दिनों के भीतर प्रारंभ करने का प्रयास किया जाएगा, खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत जल्द शुरू होगी तथा जरूरतमंद क्षेत्रों में फिलहाल टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे मामले को उपायुक्त पलामू के संज्ञान में लाया गया है और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

इसी दौरान जाम स्थल पर एक महिला अचानक बेहोश हो गई, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। अंचलाधिकारी राजीव कुमार ने तत्काल पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर एंबुलेंस की व्यवस्था कराई और महिला को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। इलाज के बाद महिला की स्थिति सामान्य बताई गई।

जाम के दौरान झारखंड प्रदेश कांग्रेस महासचिव एवं गढ़वा प्रभारी सुरजीत नागवाला तथा सांसद प्रतिनिधि रीमा शर्मा भी यातायात बाधित होने के कारण वहीं फंसे रहे।

कई घंटों तक चली वार्ता के बाद जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के आश्वासन पर ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया और सड़क जाम हटा लिया। इसके बाद पांकी-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह सामान्य हो गया और वाहनों का आवागमन सुचारू रूप से शुरू हो गया।

हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे दोबारा बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

मौके पर जिला परिषद सदस्या निधि सिंह, राजीव गांधी पंचायती राज मिशन के जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह चंदेल, कोनवाई पंचायत के मुखिया, सांसद प्रतिनिधि डॉ. बीरेंद्र, पंचायत समिति सदस्य लक्ष्मण सिंह सहित बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, महिला और पुरुष ग्रामीण मौजूद रहे।

कोनवाई पंचायत का यह आंदोलन एक बार फिर इस बात का संकेत है कि पेयजल संकट अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि जनजीवन से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिसके स्थायी समाधान की मांग वर्षों से लगातार की जा रही है।

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