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पलामू को कानूनी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता : अधिवक्ता हृदयानंद मिश्र

मेदिनीनगर, पलामू।
वरिष्ठ अधिवक्ता, सामाजिक चिंतक एवं झारखंड प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति के सदस्य हृदयानंद मिश्र ने कहा है कि न्याय तक आम नागरिकों की सहज, सुलभ और त्वरित पहुँच सुनिश्चित करने के लिए पलामू प्रमंडल को कानूनी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना समय की प्रमुख आवश्यकता है।

उन्होंने झारखंड के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को प्रेषित अपने सुझावों में पलामू में विभिन्न विशेष न्यायालयों (स्पेशल कोर्ट) की स्थापना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इससे पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले के लोगों को न्याय प्राप्त करने के लिए अन्य शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

हृदयानंद मिश्र ने कहा कि पलामू में मानवाधिकार न्यायालय, पर्यावरण न्यायालय, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण न्यायालय, बाल अधिकार न्यायालय सहित अन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना की जानी चाहिए। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बन सकेगी।

उन्होंने यह भी मांग की कि पलामू सहित राज्य के सभी जिलों में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (Special Public Prosecutor) की नियुक्ति संबंधित जिला बार एसोसिएशन के अनुभवी एवं विषय-विशेषज्ञ अधिवक्ताओं में से की जाए। साथ ही लोक अभियोजक एवं अपर लोक अभियोजक के पदों पर भी योग्य, अनुभवी और स्थानीय अधिवक्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाए।

श्री मिश्र ने न्यायिक व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर बल देते हुए कहा कि ई-एफआईआर, डिजिटल केस डायरी, ई-चार्जशीट, पेपरलेस न्यायालय तथा न्यायालयों के सभी आदेशों एवं अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनेगी।

उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अनुरूप न्यायालयों, अभियोजन तंत्र और पुलिस व्यवस्था में आधुनिक डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही फॉरेंसिक विज्ञान को सशक्त बनाने, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना तथा गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण संस्थानों के विकास पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

हृदयानंद मिश्र ने कहा कि पलामू ऐतिहासिक, सामाजिक और भौगोलिक दृष्टि से झारखंड का एक महत्वपूर्ण प्रमंडल है। यदि यहां न्यायिक अवसंरचना का व्यापक विस्तार किया जाता है, तो इससे न केवल न्याय व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि राज्य सरकार इस दिशा में दूरदर्शी और ठोस पहल करती है, तो पलामू कानूनी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा और आम नागरिकों तक सुलभ एवं प्रभावी न्याय पहुँचाने का लक्ष्य साकार होगा।

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