राँची, 25 दिसंबर 2025
एशिया महादेश के सबसे बड़े कुन्दरी लाह बागान के पुनर्जीवन की दिशा में बड़ी और निर्णायक पहल सामने आई है। झारखंड के संसदीय कार्य सह वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 में कुन्दरी लाह बागान में लाह की खेती प्रारंभ की जाएगी। यह घोषणा पलामू सहित पूरे झारखंड के हजारों लाह उत्पादक किसानों के लिए बड़ी राहत और उम्मीद लेकर आई है।
गौरतलब है कि 2 दिसंबर 2025 को कुन्दरी लाह बागान क्षेत्र में मंत्री राधा कृष्ण किशोर का दौरा हुआ था। यह दौरा लाह खेती को पुनर्जीवित करने में लंबे समय से संघर्षरत उद्घोष फाउंडेशन के अध्यक्ष कमलेश सिंह के विशेष आग्रह पर संभव हुआ था। उस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने मंत्री के समक्ष कुन्दरी लाह बागान को पुनर्जीवित कर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की मांग रखी थी, जिस पर मंत्री ने 2026 से लाह की खेती शुरू करने का आश्वासन दिया था।
उसी आश्वासन के अनुपालन में बुधवार को रांची स्थित झारखंड सरकार के प्रोजेक्ट भवन में मंत्री राधा कृष्ण किशोर की अध्यक्षता में एक संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार, आरसीसीएफ पलामू क्षेत्र एस. आर. नकेशा सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस बैठक में पलामू क्षेत्र में लाह खेती को बढ़ावा देने और कुन्दरी लाह बागान के संपूर्ण विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वर्ष 2026 में लाह खेती शुरू करने के लिए सभी प्रशासनिक, तकनीकी और संरचनात्मक आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएंगे। इसके साथ ही यह तय किया गया कि कुन्दरी लाह बागान क्षेत्र में एक संयुक्त समीक्षा बैठक 10 जनवरी 2025 से पूर्व आयोजित की जाएगी, जिसमें स्वयं मंत्री राधा कृष्ण किशोर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग के सभी संबंधित अधिकारी, झास्कोलम्पफ रांची के प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय द्वितीयक कृषि संस्थान–भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के निदेशक सहित अन्य विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
इस संबंध में उद्घोष फाउंडेशन के अध्यक्ष कमलेश सिंह ने कहा कि यह बैठक और सरकार का यह निर्णय वर्षों के संघर्ष, ग्रामीणों की एकजुटता और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि एशिया का सबसे बड़ा कुन्दरी लाह बागान अब पुनः जीवित होने के कगार पर है। यदि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, तो आने वाले समय में पलामू क्षेत्र के हजारों किसान परिवारों को सीधे रोजगार मिलेगा और क्षेत्र में पलायन व बेरोजगारी की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।

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