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जन समाधान दिवस में गूंजीं जनता की समस्याएं, कमीशन मांगने और मुआवजा लंबित होने की शिकायतें पहुंचीं डीसी दरबार

पलामू में आयोजित जन समाधान दिवस में सड़क अतिक्रमण, रोजगार, भूमि मुआवजा और योजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लोगों ने प्रशासन से लगाई गुहार

पलामू जिले में बुधवार को आयोजित जन समाधान दिवस आम लोगों की उम्मीदों और परेशानियों का बड़ा मंच बनकर सामने आया। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के अलग-अलग प्रखंडों से पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रखीं।

कार्यक्रम के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लोगों ने योजनाओं में देरी, सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण और कथित रूप से कमीशन मांगने जैसी शिकायतें दर्ज कराईं। उपायुक्त ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि प्राप्त शिकायतों का निष्पादन 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए और किसी भी मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

जन समाधान दिवस में हुसैनाबाद वार्ड संख्या-16 निवासी रियाजुद्दीन अंसारी ने शिकायत की कि मोबिन आलम द्वारा उनके घर तक जाने वाला रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नीलांबर-पीतांबरपुर प्रखंड के ग्राम चौरा से पहुंचे पंचायत समिति सदस्य ने 15वें वित्त आयोग की वर्ष 2022-23 की योजना का भुगतान लंबित रहने और स्थानीय मुखिया द्वारा कथित रूप से कमीशन मांगने का आरोप लगाया।

इसके अलावा मेदिनीनगर के साहित्य समाज चौक निवासी दीपक कुमार ने प्रशासन से रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। वहीं पड़वा प्रखंड निवासी अशोक साव ने एनएच-75 निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि का अब तक मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत उपायुक्त के समक्ष रखी।

कार्यक्रम के दौरान भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, पीएम आवास योजना, राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और आपूर्ति विभाग से जुड़ी कई शिकायतें भी सामने आईं। कुछ मामलों में उपायुक्त ने मौके पर ही संबंधित बीडीओ और सीओ को फोन कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि पीड़ितों को जल्द राहत मिल सके।

### निष्कर्ष

जन समाधान दिवस एक बार फिर यह दिखाने में सफल रहा कि प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद लोगों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कितना अहम है। हालांकि, कार्यक्रम में सामने आई शिकायतों ने यह भी संकेत दिया कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और पारदर्शिता को लेकर अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान तय समय सीमा के भीतर कितना प्रभावी ढंग से हो पाता है।

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