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भीषण गर्मी में मानवता की मिसाल: पलामू में मुफ्त बांटे जाएंगे मिट्टी के घड़े, राहगीरों को मिलेगा ठंडा पानी

अविनाश देव की पहल से जिलेभर में खुलेंगी पनशालाएं, कुम्हारों को भी मिलेगा रोजगार का सहारा

झारखंड के पलामू जिले में पड़ रही प्रचंड गर्मी के बीच इंसानियत और जनसेवा की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। लगातार बढ़ते तापमान और लू से परेशान लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से मेदिनीनगर के समाजसेवी एवं झारखंड माटी कला बोर्ड के सदस्य सह संत मरियम स्कूल के चेयरमैन अविनाश देव ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की है। उन्होंने घोषणा की है कि जिले में जो भी व्यक्ति या संस्था पनशाला खोलकर राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना चाहती है, उन्हें उनकी ओर से मुफ्त मिट्टी के घड़े उपलब्ध कराए जाएंगे।

अविनाश देव का मानना है कि भीषण गर्मी में प्यासे लोगों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य और सच्ची मानव सेवा है। इसी भावना के साथ उन्होंने इस जनहित अभियान को शुरू करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि यदि शहर से लेकर गांव तक प्रमुख चौक-चौराहों और बाजारों में पनशालाएं शुरू हो जाएं, तो तपती धूप में सफर करने वाले हजारों लोगों को राहत मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि इस सेवा अभियान से जुड़ने के इच्छुक आम नागरिक, सामाजिक संगठन, युवा समूह, व्यापारी या अन्य समाजसेवी सीधे मेदिनीनगर स्थित माटी कला बोर्ड कार्यालय पहुंचकर मुफ्त में मिट्टी के घड़े प्राप्त कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल पानी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत करना है।

गौरतलब है कि मिट्टी के घड़ों का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। प्लास्टिक और अन्य कृत्रिम साधनों की तुलना में मिट्टी के घड़े पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं। ऐसे में यह अभियान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है।

इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे स्थानीय कुम्हारों और माटी कला से जुड़े कारीगरों को भी सीधा लाभ मिलेगा। बड़ी संख्या में घड़ों की मांग बढ़ने से पारंपरिक मिट्टी कला को प्रोत्साहन मिलेगा और कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।

मानवता, पर्यावरण और रोजगार—तीनों को जोड़ती पहल

आज के दौर में जहां लोग अपनी व्यस्त जिंदगी में सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर होते जा रहे हैं, वहीं अविनाश देव की यह पहल समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश बनकर उभरी है। प्यासे राहगीरों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ यह अभियान पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को भी मजबूती देने का काम करेगा। पलामू में इस जनसेवा अभियान की चर्चा तेजी से हो रही है और लोग इसे मानवता की सच्ची मिसाल मान रहे हैं।

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