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लोकभवन में हुआ ऐतिहासिक पुस्तक लोकार्पण, BBIN देशों के ऊर्जा सहयोग पर डॉ. सिमी मेहता की पुस्तक बनी चर्चा का केंद्र


रांची: आज का दिन झारखंड के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक रहा, जब झारखंड की सुपुत्री एवं अंतरराष्ट्रीय नीति विशेषज्ञ डॉ. सिमी मेहता द्वारा लिखित पुस्तक “BBIN—A Post-SAARC Phenomenon: Unlocking the Potential for Energy Cooperation” का भव्य लोकार्पण राजभवन स्थित लोकभवन में सम्पन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण अवसर पर झारखंड के महामहिम राज्यपाल Santosh Kumar Gangwar ने पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद एवं भाजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu, पूर्व मंत्री Bhanu Pratap Shahi, भाजपा प्रदेश महामंत्री Manoj Singh तथा पांकी विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं लेखिका के पिता Kushwaha Shashi Bhushan Mehta की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
डॉ. सिमी मेहता वर्तमान में Oxford Group of Institutions, झारखंड में Academic Director के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह नई दिल्ली स्थित Impact and Policy Research Institute की CEO एवं Editorial Director भी हैं। उनकी यह पुस्तक Indian Council of World Affairs (ICWA) द्वारा प्रकाशित की गई है, जो भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक है।
SAARC के बाद BBIN मॉडल की नई दिशा
पुस्तक में दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय सहयोग के वर्तमान परिदृश्य का गहन विश्लेषण किया गया है। डॉ. सिमी मेहता ने बताया कि जहाँ SAARC अपेक्षित स्तर पर प्रभावी क्षेत्रीय सहयोग स्थापित करने में सफल नहीं हो पाया, वहीं BBIN—अर्थात बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल—एक व्यावहारिक, परिणामोन्मुखी और अधिक कार्यात्मक क्षेत्रीय मॉडल के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने पुस्तक में चारों देशों की ऊर्जा संबंधी विशिष्टताओं और परस्पर पूरक क्षमताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया है। पुस्तक के अनुसार—
बांग्लादेश प्राकृतिक गैस संसाधनों से समृद्ध है,
भूटान और नेपाल विशाल जलविद्युत क्षमता रखते हैं,
जबकि भारत कोयला, सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक संसाधनों वाला देश है।
लेखिका का मानना है कि यदि इन चार देशों के बीच समन्वित ऊर्जा सहयोग विकसित किया जाए, तो दक्षिण एशिया में एक मजबूत, टिकाऊ और लचीला क्षेत्रीय ऊर्जा तंत्र स्थापित किया जा सकता है।
ऊर्जा सहयोग से क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल
पुस्तक में सीमा-पार विद्युत व्यापार (Cross-Border Electricity Trade), साझा विद्युत ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारी तथा क्षेत्रीय ऊर्जा अवसंरचना के विकास को भविष्य की आवश्यकता बताया गया है। डॉ. मेहता ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और सतत विकास को भी मजबूत करेगा।
उन्होंने इस दौरान महामहिम राज्यपाल को पुस्तक में उल्लिखित प्रमुख चुनौतियों से भी अवगत कराया। इनमें—
अवसंरचनात्मक बाधाएँ, नियामकीय जटिलताएँ, प्रशासनिक विलंब, वित्तीय चुनौतियाँ,
तथा सदस्य देशों के बीच राजनीतिक अविश्वास जैसी समस्याएँ शामिल हैं।
पुस्तक में दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव
इन चुनौतियों से निपटने के लिए पुस्तक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें—
क्षेत्रीय नियामकीय ढाँचों का सामंजस्यीकरण,
सीमा-पार विद्युत व्यापार को प्रोत्साहन,
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा,
क्षेत्रीय ट्रांसमिशन अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण,
तथा एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), विश्व बैंक एवं इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) जैसे बहुपक्षीय संस्थानों के सहयोग का अधिकतम उपयोग शामिल है।
झारखंड की ऊर्जा विरासत और भविष्य की दिशा
डॉ. सिमी मेहता ने कहा कि झारखंड ने दशकों तक देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को कोयले के माध्यम से मजबूत आधार प्रदान किया है, लेकिन अब समय सतत एवं स्वच्छ ऊर्जा संसाधनों की ओर बढ़ने का है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि BBIN देशों के बीच सहयोग इस परिवर्तन को गति देने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पुस्तक केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता, समृद्धि, शांति और सतत विकास के लिए एक दूरदर्शी क्षेत्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने डॉ. सिमी मेहता को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएँ दीं तथा इसे झारखंड के लिए गौरव का विषय बताया।

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