जंगल सफारी, वन्यजीव और ग्रामीण संस्कृति ने विदेशी मेहमान को किया मंत्रमुग्ध
झारखंड का प्रसिद्ध Betla National Park एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनता नजर आ रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व के घने जंगलों, प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांचक जंगल सफारी का जादू अब विदेशी सैलानियों को भी अपनी ओर खींच रहा है।
हाल ही में फ्रांस से पहुंचे एक पर्यटक ने बेतला की वादियों में जंगल सफारी का आनंद लिया। यहां की हरियाली, शांत वातावरण और वन्यजीवों की दुनिया ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी एक दिन की यात्रा को बढ़ाकर तीन दिनों तक का प्रवास कर लिया। यह बदलाव साफ दर्शाता है कि बेतला की प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ रही है।
जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2025 में भी फ्रांस से पर्यटकों का एक दल बेतला पहुंचा था। अब एक बार फिर विदेशी मेहमानों की मौजूदगी ने इस पर्यटन स्थल की अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई मजबूती दी है। फ्रांस से आए पर्यटक ने जंगल सफारी के दौरान कई वन्यजीवों को करीब से देखा, मंडल डैम क्षेत्र का भ्रमण किया और आसपास के ग्रामीण जीवन को भी नजदीक से समझने की कोशिश की। हालांकि, उन्होंने निजी कारणों से अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया है।
पलामू टाइगर रिजर्व के उप निदेशक Prajeshkant Jena ने बताया कि पलामू टाइगर रिजर्व देश के शुरुआती टाइगर रिजर्व में शामिल है और यहां हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस से आए सैलानी का अनुभव बेहद सकारात्मक रहा, जो आने वाले समय में बेतला नेशनल पार्क की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने में मदद करेगा।
हर साल 40 हजार से अधिक पर्यटक बेतला नेशनल पार्क पहुंचते हैं। खासकर पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में लोग यहां जंगल सफारी, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों का आनंद लेने आते हैं। कोविड-19 महामारी के बाद अब विदेशी पर्यटकों की वापसी ने स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में भी नई उम्मीद जगाई है।
मेदिनीनगर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित बेतला नेशनल पार्क झारखंड के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहां का प्राकृतिक वातावरण, जैव विविधता और रोमांचक सफारी अनुभव न सिर्फ देश बल्कि विदेशों के पर्यटकों को भी लगातार आकर्षित कर रहा है।
मजबूत हो रही अंतरराष्ट्रीय पहचान
विदेशी पर्यटकों की बढ़ती दिलचस्पी इस बात का संकेत है कि बेतला नेशनल पार्क अब केवल झारखंड या भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भी अपनी अलग पहचान बना रहा है। यदि इसी तरह पर्यटन सुविधाओं और संरक्षण कार्यों को बढ़ावा मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में बेतला अंतरराष्ट्रीय इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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