मेदिनीनगर/रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस की कोऑर्डिनेशन कमिटी के सदस्य एवं अधिवक्ता हृदयानंद मिश्र ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी सैन्य हमलों के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत की खबर पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी विदेशी शक्ति की सैन्य कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की जान जाती है तो यह केवल एक मानवीय त्रासदी नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन जाता है।
जारी बयान में हृदयानंद मिश्र ने कहा कि ऐसे मामलों में देश की जनता अपने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से स्पष्ट प्रतिक्रिया की अपेक्षा करती है। उनका कहना है कि सरकार को मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए, घटना के तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए तथा संबंधित देश से जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब इस तरह की घटनाओं पर शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आती, तो स्वाभाविक रूप से अनेक प्रश्न खड़े होते हैं।
मिश्र ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की शक्ति उसकी जवाबदेही और पारदर्शिता से मापी जाती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी भारतीय नागरिक की मृत्यु पाकिस्तान, चीन या किसी अन्य देश की कार्रवाई में होती तो संभवतः राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक बहस और त्वरित सरकारी प्रतिक्रिया देखने को मिलती। ऐसे में अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के मामले में भी समान संवेदनशीलता और स्पष्टता दिखाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल आधार हमेशा राष्ट्रीय हित, स्वाभिमान और नागरिकों की सुरक्षा रहा है। मित्र देशों के साथ अच्छे संबंध महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी राष्ट्र के लिए उसके नागरिकों का सम्मान और सुरक्षा सर्वोपरि होना चाहिए। मित्रता का अर्थ यह नहीं है कि किसी मित्र राष्ट्र के कदमों पर सवाल न उठाए जाएं।
अपने बयान में हृदयानंद मिश्र ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का उल्लेख करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व को याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में अमेरिका द्वारा भारत पर दबाव बनाने की कोशिशों के बावजूद इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता नहीं किया और दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम है। उनके अनुसार, वह भारतीय विदेश नीति के आत्मसम्मान और स्वतंत्र निर्णय क्षमता का प्रतीक था।
मिश्र ने कहा कि आज जब भारतीय नागरिकों की मौत का मामला सामने आया है, तब देश के नागरिक उसी परंपरा को याद कर रहे हैं, जिसमें भारतीय नेतृत्व विदेशी शक्तियों के सामने अपने नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा दिखाई देता था। उन्होंने कहा कि यह किसी दल विशेष की राजनीति का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सरकार की नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि घटना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा अमेरिका से औपचारिक रूप से स्पष्टीकरण मांगा जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों के जीवन का मूल्य किसी भी भू-राजनीतिक या कूटनीतिक समीकरण से ऊपर होना चाहिए।
बयान के अंत में हृदयानंद मिश्र ने कहा कि राष्ट्रवाद केवल भाषणों, नारों और चुनावी मंचों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसका वास्तविक अर्थ प्रत्येक भारतीय नागरिक के जीवन, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि जब किसी भारतीय का रक्त विदेशी धरती या अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बहता है, तब पूरे राष्ट्र की संवेदनाएं उससे जुड़ जाती हैं और ऐसे समय में सरकार की ओर से स्पष्टता, संवेदनशीलता और दृढ़ता अपेक्षित होती है।
— हृदयानंद मिश्र, एडवोकेट
सदस्य, कोऑर्डिनेशन कमिटी, झारखंड प्रदेश कांग्रेस
संपादकीय नोट: समाचार प्रकाशित करते समय यह उल्लेख करना उचित होगा कि यह हृदयानंद मिश्र द्वारा जारी बयान और उनके व्यक्तिगत/राजनीतिक विचार हैं। घटना और सरकारी पक्ष का संस्करण उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
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