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मेदिनीनगर के हजारों परिवारों को बड़ी राहत, भवन नियमितीकरण नियम 2026 पर मुख्यमंत्री और मंत्री का जताया गया आभार

सन्नी शुक्ला बोले — “जनता को राहत देने का काम कर रही हेमंत सरकार, अब गरीबों का आशियाना रहेगा सुरक्षित”

झारखंड सरकार की ओर से लागू किए गए झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स 2026 ने मेदिनीनगर समेत पूरे पलामू प्रमंडल के हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है। वर्षों से बिना स्वीकृत नक्शे के बने घरों में रहने वाले लोगों के लिए यह फैसला किसी सुकून से कम नहीं माना जा रहा। झामुमो नेता सन्नी शुक्ला और उनकी युवा टीम ने मुख्यमंत्री Hemant Soren तथा नगर विकास मंत्री Sudivya Kumar Sonu के प्रति आभार प्रकट करते हुए इसे जनहित में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय बताया है।

सन्नी शुक्ला ने कहा कि मेदिनीनगर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने जीवनभर की कमाई जोड़कर अपने घर बनाए, लेकिन नक्शा स्वीकृत नहीं होने की वजह से हमेशा असमंजस और कानूनी डर में जीते रहे। अब सरकार के इस फैसले से उन लोगों को अपने ही घर पर अधिकार और सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार केवल विकास के बड़े-बड़े दावे नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर आम लोगों की समस्याओं का समाधान भी कर रही है।

उन्होंने विपक्ष और कुछ स्थानीय लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि कई लोग इस फैसले का राजनीतिक लाभ लेने और झूठा श्रेय बटोरने में लगे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि राज्य सरकार ने जनता की वास्तविक परेशानियों को समझते हुए यह कदम उठाया है। मेदिनीनगर की जनता सरकार के इस फैसले को राहत और सम्मान से जोड़कर देख रही है।

क्या है नया नियम?

नई अधिसूचना के मुताबिक 31 दिसंबर 2024 तक बिना नक्शा के बने आवासीय और व्यावसायिक भवनों को नियमित कराने का मौका दिया गया है। इसके तहत भवन मालिक अब अपने वर्तमान निर्माण के अनुसार नक्शा तैयार कराकर उसे स्वीकृत करा सकते हैं। इसके लिए नगर निकाय से निबंधित आर्किटेक्ट या लाइसेंस प्राप्त तकनीकी विशेषज्ञ की सहायता लेनी होगी।

सरकार ने आवासीय भवनों के लिए 10 हजार रुपये और व्यावसायिक भवनों के लिए 20 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया है। आवेदन के समय कुल शुल्क का कम से कम 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य होगा, जबकि शेष राशि तीन आसान किस्तों में जमा की जा सकेगी।

इसके अतिरिक्त 17.22 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से लेबर सेस भी लिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी भवन का क्षेत्रफल 1000 वर्गफीट है, तो करीब 17 हजार 220 रुपये लेबर सेस के रूप में जमा करने होंगे। वहीं आर्किटेक्ट की फीस अलग से 15 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से देनी होगी।

ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया

भवन नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से होगी। भवन मालिकों को बीपीएएमएस पोर्टल पर आवेदन करना होगा। आवेदन के बाद दस्तावेजों और भवन विवरण की जांच कर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सन्नी शुक्ला ने कहा कि यह फैसला सिर्फ भवनों को वैध करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों को सम्मान और मानसिक राहत देने वाला कदम है, जो वर्षों से अनिश्चितता में जीवन बिता रहे थे।

मजबूत निष्कर्ष

मेदिनीनगर में इस फैसले को आम जनता के हित में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार की इस पहल से न केवल हजारों परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि नगर निकायों को भी व्यवस्थित राजस्व प्राप्त होगा। सबसे अहम बात यह है कि अब मेहनत की कमाई से बनाए गए घरों पर लोगों का भरोसा और अधिकार दोनों मजबूत होंगे।

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