ad

ad

पलामू की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना के शिल्पी थे ज्योति प्रकाश : हृदयानंद मिश्र

मेदिनीनगर, प्रतिनिधि
प्रख्यात साहित्यकार, अधिवक्ता एवं झारखंड राज्य हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य हृदयानंद मिश्र ने साहित्यकार ज्योति प्रकाश की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने पलामू और झारखंड की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना को नई दिशा देने का ऐतिहासिक कार्य किया। सीमित संसाधनों और पिछड़े परिवेश के बावजूद उन्होंने साहित्य, संगीत और संस्कृति की ऐसी मशाल जलाई, जिसकी रोशनी आज भी नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रही है।

हृदयानंद मिश्र ने अपने श्रद्धांजलि लेख में कहा है कि आम जनमानस में "जोतिन बाबू" के नाम से प्रसिद्ध ज्योति प्रकाश केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन के अग्रदूत थे। उनका जन्म 30 अगस्त 1920 को लोहरदगा में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने पटना के बी.एन. कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की और छात्र जीवन में ही हिंदी साहित्य की प्रतिष्ठित हस्तियों के संपर्क में आए।

उन्होंने बताया कि मात्र 15-16 वर्ष की आयु में ज्योति प्रकाश ने बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका "बाल-विनोद" का संपादन संभालकर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी पहली साहित्यिक कृति "झिलमिल" हिंदी किशोर साहित्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है, जबकि "बुलबुल" ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा इसकी उपयोगिता स्वीकार किए जाने के बाद इसे शांति निकेतन के पाठ्यक्रम में भी स्थान मिला।

मिश्र ने कहा कि ज्योति प्रकाश का जीवन संघर्ष, संवेदना और मानवीय मूल्यों का प्रतीक था। निजी जीवन में अनेक दुखद परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने साहित्य और संस्कृति की सेवा को अपना ध्येय बनाए रखा। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, लोकजीवन, मानवीय संबंधों और सामाजिक सरोकारों की गहरी छाप दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब साहित्य बाजारवाद और तात्कालिक लोकप्रियता के दबाव से जूझ रहा है, तब ज्योति प्रकाश जैसे रचनाकारों का स्मरण समाज को मूल्यपरक साहित्य और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देता है। नई पीढ़ी को उनके साहित्य और जीवन संघर्ष से परिचित कराने की आवश्यकता है। उनकी रचनाओं पर गंभीर शोध और पुनर्पाठ ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Featured News

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर जागरूकता अभियान, मातृत्व संघ ने दिया सशक्तिकरण का संदेश