पलामू। जिले में हाल के दिनों में दहेज प्रताड़ना एवं महिला उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंतित *मातृत्व संघ, पलामू* की टीम ने रविवार को बंदुआ गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं और किशोरियों को आत्मनिर्भर बनने, अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने तथा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न का साहसपूर्वक विरोध करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मातृत्व संघ की संस्थापक पूजा रत्नाकर (धनबाद) ने कहा कि महिलाओं को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, वहीं पारिवारिक जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का भी संतुलित निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद बेटियों को ससुराल को अपना घर मानकर आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन किसी भी प्रकार की मानसिक, शारीरिक या आर्थिक प्रताड़ना को कभी स्वीकार नहीं करना चाहिए।
मातृत्व संघ, पलामू की जिलाध्यक्ष शर्मिला वर्मा ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बेटी के विवाह के बाद माता-पिता को पूरी तरह निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए। उन्हें समय-समय पर अपनी बेटी की स्थिति और कुशलक्षेम की जानकारी लेते रहना चाहिए। यदि किसी प्रकार के उत्पीड़न की जानकारी मिले तो बिना सामाजिक दबाव की चिंता किए बेटी को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए।
संघ की उपसचिव रानू सिन्हा ने कहा कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं। उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत और शिक्षित बेटियां किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम होती हैं।
इस अवसर पर अधिवक्ता सुधा पांडे ने महिलाओं एवं बालिकाओं को उपलब्ध कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के लिए विभिन्न कानून प्रभावी हैं, जबकि बच्चों के संरक्षण के लिए पॉक्सो एक्ट जैसे सशक्त प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने महिलाओं से किसी भी परिस्थिति में निराश होकर गलत कदम न उठाने तथा न्यायिक व्यवस्था का सहारा लेने की अपील की।
कार्यक्रम में संघ की कोऑर्डिनेटर मंजू चंद्रा ने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए सरकार और प्रशासन निरंतर कार्य कर रहे हैं। किसी भी प्रकार की समस्या या उत्पीड़न की स्थिति में महिलाओं को पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों से सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
शिक्षिका रीता सिन्हा ने कहा कि बेटा और बेटी दोनों समान रूप से परिवार की धरोहर हैं। उन्होंने बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आत्मरक्षा और नेतृत्व क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा समाज से महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की सराहना करते हुए बंदुआ पंचायत परिषद की सदस्य सरिता देवी ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता अभियान सभी पंचायतों में नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए, ताकि महिलाएं और किशोरियां अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों तथा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न का डटकर मुकाबला कर सकें।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में बंदुआ गांव के मुखिया दीनानाथ मांझी, छात्र नेता विनीत पांडे तथा स्थानीय ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
जागरूकता अभियान के माध्यम से मातृत्व संघ ने स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता ही एक सशक्त एवं संवेदनशील समाज की आधारशिला है।**
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