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रामपुर की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई : श्याम नारायण सिंह

मेदिनीनगर। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी, शिक्षा विभाग के स्टेट चेयरमैन श्याम नारायण सिंह ने रामपुर में घटित हालिया घटना को अत्यंत दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण एवं सामाजिक सौहार्द के लिए चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती प्रस्तुत करती हैं, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और भाईचारे को भी प्रभावित करती हैं।

श्री सिंह ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक एवं सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं हो सकता और हर परिस्थिति में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राप्त सूचनाओं एवं स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों के अनुसार उक्त घटना के मूल में लंबे समय से चला आ रहा भूमि विवाद प्रतीत होता है। दोनों पक्षों के बीच काफी समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी, जिससे तनाव लगातार बढ़ रहा था।

उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन इस मामले को पहले से गंभीरता, संवेदनशीलता एवं दूरदर्शिता के साथ लेते हुए समय रहते हस्तक्षेप करता और समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाती, तो संभवतः इतनी गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं होती। प्रशासन की भूमिका केवल घटना घटने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि संभावित विवादों को समय रहते रोकना भी उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

श्याम नारायण सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली, संपन्न या राजनीतिक रूप से मजबूत क्यों न हो, यदि उसने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके विरुद्ध कठोर एवं निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि घटना के क्रम में यदि किसी भी पक्ष के लोगों द्वारा आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया गया है, तो पुलिस प्रशासन को निष्पक्षता के आधार पर सभी दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सुसंगत धाराओं में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

श्री सिंह ने कहा कि ऐसी संवेदनशील घटनाओं पर कुछ राजनीतिक दलों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बिना नाम लिए भाजपा के स्थानीय विधायक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी घटना को राजनीतिक रंग देकर सामाजिक तनाव बढ़ाने की कोशिश किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं मानी जा सकती। जनप्रतिनिधियों का दायित्व क्षेत्र में शांति, सद्भाव, भाईचारा एवं कानून-व्यवस्था को मजबूत करना होता है, न कि ऐसी परिस्थितियों में उत्तेजना फैलाने या समाज को विभाजित करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देना।

उन्होंने कहा कि यह भी आश्चर्यजनक है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अब तक इस गंभीर विषय पर कोई स्पष्ट और जिम्मेदार प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जब समाज में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो, तब राजनीतिक दलों और उनके नेताओं का दायित्व बनता है कि वे लोगों के बीच विश्वास कायम करें तथा शांति और सौहार्द का संदेश दें।

श्री सिंह ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि किसी घटना की जांच के दौरान यदि केवल एक पक्ष को लक्ष्य बनाकर कार्रवाई की जाती है, तो इससे न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन को निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि सभी पक्षों को न्याय मिल सके और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके।

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