पलामू/गढ़वा। रामपुर में 23 मई को हुई गोलीबारी और सकेंद्र चौधरी की हत्या को लेकर चल रहा विवाद अब लगातार राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप ग्रहण करता जा रहा है। एक ओर जिला प्रशासन ने क्षेत्र में संभावित तनाव को देखते हुए धारा 163 लागू कर भीड़ जुटाने और सभा-समारोहों पर प्रतिबंध लगाया, वहीं दूसरी ओर भाकपा माले ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बताते हुए पलामू-गढ़वा सीमा क्षेत्र में प्रतिरोध संकल्प सभा आयोजित की।
भाकपा माले की पलामू और गढ़वा जिला कमेटियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड और बिहार के कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण सभा का आयोजन रामपुर में न होकर गढ़वा जिले के डंडा थाना क्षेत्र स्थित कोर्टा से मार्च निकालते हुए पलामू-गढ़वा सीमा क्षेत्र में किया गया। सभा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
रामपुर की घटना बनी राजनीतिक बहस का केंद्र
रामपुर में हुई गोलीबारी और सकेंद्र चौधरी की हत्या के बाद से क्षेत्र में दो समानांतर बहसें चल रही हैं। एक पक्ष हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को न्याय और भूमि विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। वहीं प्रशासन और कुछ सामाजिक संगठन कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा सामाजिक तनाव को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
इसी बीच धारा 163 लागू किए जाने के फैसले को लेकर भी बहस तेज हो गई है। भाकपा माले नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने आंदोलन को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया, जबकि प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अरूप चटर्जी ने विधानसभा में मामला उठाने का किया ऐलान
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले झारखंड विधायक दल के नेता एवं आश्वासन समिति के अध्यक्ष कॉमरेड अरूप चटर्जी ने कहा कि रामपुर की घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि गरीबों, कमजोरों और भूमिहीनों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में भूमाफिया और सामंती प्रवृत्ति के लोगों का मनोबल बढ़ा है तथा प्रशासन ऐसे तत्वों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई करने में विफल रहा है। उन्होंने मांग की कि सकेंद्र चौधरी के परिवार को सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाए।
चटर्जी ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में रामपुर का मामला प्रमुखता से उठाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
अरुण सिंह ने प्रशासन से पूछे तीखे सवाल
भाकपा माले बिहार विधायक दल के नेता कॉमरेड अरुण सिंह ने कहा कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोग अपराधियों को संरक्षण देने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जारी रहेगी।
विनोद कुमार सिंह बोले – संघर्ष जारी रहेगा
भाकपा माले के वरिष्ठ नेता, पोलित ब्यूरो सदस्य और बगोदर के पूर्व विधायक कॉमरेड विनोद कुमार सिंह ने कहा कि रामपुर की घटना को सामान्य आपराधिक घटना मानना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार यह घटना ग्रामीण गरीबों और कमजोर तबकों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि भाकपा माले पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी और दोषियों को सजा मिलने तक आंदोलन नहीं रुकेगा। उन्होंने भूमि विवाद की निष्पक्ष जांच और पूरे मामले की पारदर्शी जांच की भी मांग की।
कई वरिष्ठ नेताओं ने रखी अपनी बात
सभा को पोलित ब्यूरो सदस्य एवं प्रमंडलीय प्रभारी कॉमरेड हलधर महतो, अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. बी.एन. सिंह, गढ़वा जिला सचिव कालीचरण मेहता, पलामू जिला सचिव रविंद्र भुइयां, लातेहार जिला सचिव बिरजू राम, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सुषमा मेहता, आर.एन. सिंह, भिखी पंचायत के मुखिया वीरेंद्र चौधरी, कामेश्वर विश्वकर्मा, जिला परिषद सदस्य खुशबू कुमारी, रामराज पासवान, प्रदीप विश्वकर्मा, कपिलदेव प्रजापति, कमेश सिंह चेरो, सुरेश चौधरी, अनिल तिवारी, लालमुनि मेहता, अजय मेंटल, रविंद्र चौधरी, रमाशंकर चौधरी, अविनाश रंजन, त्रिलोकीनाथ, रंजीत सिंह, दिव्या भगत, गुड्डू भुइयां, संगीता देवी, उषा देवी, कुंदन मेहता, बिट्टू पासवान और रंजीत मेहता सहित कई नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी संबोधित किया।
अब आगे क्या?
रामपुर विवाद अब केवल एक आपराधिक घटना का मामला नहीं रह गया है। हत्या, भूमि विवाद, सामाजिक तनाव, राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक कार्रवाई ने इसे पूरे पलामू प्रमंडल का महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है।
एक ओर पीड़ित पक्ष और उससे जुड़े संगठन न्याय तथा गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच की दिशा, आरोपियों की गिरफ्तारी, भूमि विवाद की निष्पक्ष पड़ताल और प्रशासन की अगली कार्रवाई पूरे मामले की दिशा तय करेगी।
फिलहाल रामपुर की जनता न्याय, सुरक्षा, पारदर्शी जांच और स्थायी शांति—चारों की प्रतीक्षा कर रही है।
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